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		<title>सीटी स्कैन और एमआरआई में अंतर (2023 with table) &#124; Difference Between CT Scan and MRI in Hindi</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Neeti Jain]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Apr 2024 13:35:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Medical]]></category>
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					<description><![CDATA[Difference Between CT Scan and MRI - आज के आर्टिकल में हम पहले MRI और CT Scan तकनीक क्या है ये समझेंगे उसके बाद इन दोनों के बीच के अंतर को विस्तृत तौर पर जानेंगें!]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1 style="text-align: justify;"><strong>सीटी स्कैन और एमआरआई में अंतर (2023 with table), Difference Between CT Scan and MRI in Hindi<br />
</strong></h1>
<p style="text-align: justify;">Difference Between CT Scan and MRI in Hindi  &#8211; दोस्तों CT Scan और MRI दोनों का उपयोग ही हमारे शरीर के अंदरूनी भागों को देखने और उनके चित्रों को तैयार करने के लिए किया जाता है।</p>
<p style="text-align: justify;">दोनों ही प्रक्रियाओं में आपको कुछ मशीनों के संपर्क में लाया जाता है जिसके बाद आपके अंदरूनी शरीर का चित्र तैयार किया जाता है। हालांकि दोनों ही माध्यमों का उद्देश्य अंदरूनी शरीर का चित्र तैयार करना है परंतु दोनों का इस्तेमाल और इनके चित्र बनाने की प्रक्रिया बिल्कुल अलग है।</p>
<p style="text-align: justify;">दोस्तों यदि आप जानना चाहते हैं कि MRI और <a href="https://en.wikipedia.org/wiki/CT_scan" target="_blank" rel="noopener">CT Scan</a> क्या है और MRI और CT Scan में क्या अंतर है तो आप बिल्कुल सही जगह पर आए हैं आज इस आर्टिकल में हम आपके इसी सवाल का जवाब देने वाले हैं।</p>
<h2><strong>सीटी स्कैन और एमआरआई में अंतर ( Difference Between CT Scan and MRI in Hindi)</strong></h2>
<p style="text-align: justify;">Comparison Chart &#8211; MRI और CT-Scan की तुलना सारणी निम्नलिखित है-</p>

<table id="tablepress-1" class="tablepress tablepress-id-1">
<thead>
<tr class="row-1">
	<th class="column-1">विवरण</th><th class="column-2">MRI (एम आर आई)</th><th class="column-3">CT Scan (सीटी स्कैन)</th>
</tr>
</thead>
<tbody class="row-striping row-hover">
<tr class="row-2">
	<td class="column-1">कहाँ काम करता है</td><td class="column-2">शरीर के अंदरूनी भागों का एक विशेष चित्र तैयार करने के लिए।</td><td class="column-3">शरीर के अंदरूनी भागों का एक समान्य चित्र तैयार करने के लिए।</td>
</tr>
<tr class="row-3">
	<td class="column-1">रेडिएशन</td><td class="column-2">CT Scan के मुक़ाबले कम रेडिएशन होते है।</td><td class="column-3">MRI के मुक़ाबले अधिक रेडिएशन।</td>
</tr>
<tr class="row-4">
	<td class="column-1">कीमत</td><td class="column-2">MRI करवाना CT Scan के मुक़ाबले अधिक महँगा होता है।</td><td class="column-3">MRI की तुलना मे सस्ता माध्यम।</td>
</tr>
<tr class="row-5">
	<td class="column-1">एक्यूरेसी</td><td class="column-2">MRI विस्तृत और सपष्ट चित्र बनाने मे अधिक सक्षम।</td><td class="column-3">CT Scan असामान्य भागों को समझने और एक सामान्य चित्र बनाने मे अधिक सहायक।</td>
</tr>
<tr class="row-6">
	<td class="column-1">टेक्नोलॉजी</td><td class="column-2">MRI में रेडियो तरंगो और चुम्बकों का इस्तेमाल किया जाता है।</td><td class="column-3">CT Scan में X-Ray का इस्तेमाल किया जाता है।</td>
</tr>
<tr class="row-7">
	<td class="column-1">समय</td><td class="column-2">MRI में CT Scan की तुलना में कम समय लगता है।</td><td class="column-3">CT Scan में MRI की तुलना में अधिक समय लगता है।</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<!-- #tablepress-1 from cache -->
<h2 style="text-align: justify;"><strong>MRI क्या होता है? (What is an MRI)<br />
</strong></h2>
<p style="text-align: justify;">दोस्तों जैसा कि हम ऊपर बता चुके हैं कि MRI यानि कि Magnetic Resonance Imaging का उपयोग आपकी शरीर के अंदरूनी भागों का चित्र तैयार करने के लिए किया जाता है।</p>
<p style="text-align: justify;">MRI में रेडियो तरंगों और चुम्बकों की सहायता के द्वारा चित्र को तैयार किया जाता है। इसमे आपको एक मशीन के माध्यम से आपको रेडियो तरंगों और चुम्बकों के संपर्क मे लाया जाता है। जब इन रेडियो तरंगों को आपके शरीर में प्रवेश कराया जाता है तो आपके शरीर में अंग, शरीर में उपस्थित पानी, वसा इत्यादि इन तरंगों के संपर्क में आती है जिसकी सहायता से उस भाग का एक 3D चित्र तैयार किया जाता है।</p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>MRI के नुकसान</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">इससे निकलने वाला रेडिएशन हानिकारक हो सकता है।</p>
<p style="text-align: justify;">MRI में चुंबकों का इस्तेमाल किया जाता है तो इसमें धातुओं के साथ प्रतिक्रिया होने का खतरा रहता है। तो ऐसे में इस बात का विशेष तौर से ध्यान रखना होता है कि व्यक्ति किसी प्रकार कि धातु के संपर्क मे न हो।</p>
<p style="text-align: justify;">लंबे समय तक तेज आवाज में है रहने के कारण व्यक्ति के सुनने की क्षमता पर असर पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align: justify;">कुछ मामलों में MRI स्कैन करवाते समय व्यक्ति के शरीर के तापमान में वृद्धि भी देखी गई है।</p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>MRI का इस्तेमाल कब किया जाता है</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">MRI का इस्तेमाल मुख्यतः जोड़ों, दिमाग, एड़ियों, दिल और रक्त वाहिकाएं जैसे अंदरूनी भागों के एक स्पष्ट चित्र को तैयार करने के लिए किया जाता है।</p>
<p>आप पढ़े रहे है &#8211; Difference Between CT Scan and MRI in Hindi</p>
<h2 style="text-align: justify;"><strong>CT SCAN क्या होता है (What is CT Scan)<br />
</strong></h2>
<p style="text-align: justify;">CT-SCAN यानि कि Computed Tomography Scan में आपके शरीर के अंदरूनी भागों का चित्र तैयार करने के लिए एक्स-रे (X-RAYS) का इस्तेमाल किया जाता है।</p>
<p style="text-align: justify;">इस माध्यम में आपके शरीर में एक्स-रे तरंगों को प्रवाहित किया जाता है जो आपके शरीर में हड्डियों या अन्य कुछ भागों द्वारा ब्लॉक हो जाती है और कुछ जगहों से आपके शरीर के आर-पार चली जाती है। इसी माध्यम से आपके शरीर के अंदरूनी भागों की एक 3D चित्र तैयार किया जाता है।</p>
<p style="text-align: justify;">CT-SCAN का मुख्य उद्देश शरीर में असामान्य अंगों का पता लगाना होता है। हालांकि इसका उपयोग कुछ विशेष भागों के चित्र को तैयार करने के लिए भी किया जा सकता है जो पूरी तरह व्यक्ति के लक्षणो पर निर्भर करता है।</p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>CT SCAN के नुकसान</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">क्योंकि इस माध्यम में एक्स-रे का इस्तेमाल किया जाता है इसलिए यह नवजात शिशुओं के लिए हानिकारक हो सकता है।</p>
<p style="text-align: justify;">इसमें हमारे के मुकाबले अधिक रेडिएशन होने के कारण गर्भवती महिलाओं, बच्चों या किसी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के लिए हानिकारक हो सकता है।</p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>CT SCAN का इस्तेमाल कब किया जाता है</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">सीटी स्कैन का उपयोग मुख्यतः हड्डियों के टूटने, ट्यूमर, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का पता लगाने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग मुख्यतः सामान्य चित्र तैयार करने के लिए किया जाता है।</p>
<p style="text-align: justify;">यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि ज्यादातर मामलों में डॉक्टर आप के लक्षणों के आधार पर आपको MRI और CT-SCAN में से किसी भी माध्यम का उपयोग करने की राय देता है। ज्यादातर मामलों में MRI का सुझाव तब दिया जाता है जब व्यक्ति के किसी विशेष अंग का एक स्पष्ट चित्र को तैयार करने की आवश्यकता होती है। और सीटी स्कैन का उपयोग तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति के शरीर या किसी विशेष अंग की एक सामान्य चित्र को तैयार करने की आवश्यकता होती है।</p>
<h2 style="text-align: justify;"><strong>निष्कर्ष (Conclusion)<br />
</strong></h2>
<p style="text-align: justify;">दोस्तों MRI और CT Scan दोनों ही अंदरूनी भागों की एक छवि तैयार करने में सक्षम है। दोनों के उद्देश्य समान है परंतु माध्यम और प्रक्रिया मे अंतर है।</p>
<p style="text-align: justify;">कोई भी माध्यम चुनना आपके लक्षणों पर निभार करता है जो पूर्ण रूप से चिकित्सक का कार्य होता है। बहुत से लोग MRI और CT-Scan को सुरक्षित नहीं मानते है जो बिलकुल गलत धारणा है। दोनों ही माध्यम सुरक्षित हें और दशकों से इस्तेमाल में लाये जा रहे है। हालांकि फिर भी कुछ सावधानियों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है।</p>
<p style="text-align: justify;">दोस्तों उम्मीद करता हूँ कि आप MRI और CT-Scan क्या होता है, MRI और CT-Scan मे अंतर के बारे में जान गए होंगे। यदि हमारे आर्टिकेल से जुड़ा कोई भी आपके मन में है तो आप कमेंट सेक्शन मे पूछ सकते है। हम जल्द से जल्द आपके सवाल का जवाब देने का प्रयास करेंगे।</p>
<p>अगला आर्टिकल जरूर से पढ़े &#8211; <a class="row-title" href="https://antarjano.com/wp-admin/post.php?post=21&amp;action=edit" aria-label="“Difference Between Type1 and Type2 Diabetes in Hindi” (Edit)">Difference Between Type1 and Type2 Diabetes in Hindi</a></p>
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		<title>कोविड और सार्स में अंतर (2023 with table) &#124; 6 Difference Between COVID 19 and SARS Hindi (with table) 2023</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Neeti Jain]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Apr 2024 13:35:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Medical]]></category>
		<category><![CDATA[Corona]]></category>
		<category><![CDATA[Covid 19]]></category>
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					<description><![CDATA[Difference Between COVID 19 and SARS Hindi (with table) 2023 - आज हम कोविड और सार्स के बारे में जानकर इनके बीच के अंतर को भी समझेंगे !]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1 style="text-align: justify;">कोविड और सार्स में अंतर (2023 with table), 6 Difference Between COVID 19 and SARS Hindi (with table) 2023</h1>
<p style="text-align: justify;">Difference Between COVID 19 and SARS Hindi (with table) 2023 &#8211; दोस्तों वर्तमान समय में विश्व एक बहुत ही गंभीर महामारी से जूझ रहा है जिसका नाम है कोरोनावायरस (Coronavirus) या Covid 19। विश्व में अब तक इस महामारी से करोड़ों लोग संक्रमित हो चुके हैं और लाखों लोग अपनी जान गवा चुके हैं। मानव सभ्यता पहले भी ऐसी बीमारियों से जूझती आई है।</p>
<p style="text-align: justify;">2002 में भी एक कोरोनावायरस जिसका नाम था SARS, इसने विश्व में करीब 8000 लोगों को संक्रमित किया था जिससे करीब 700 लोगों ने जान गवा दी थी। वर्तमान समय में भी विश्व एक ऐसे ही कोरोनावायरस Covid-19 से जूझ रहा है जिसने अभी तक लाखों लोगों की जान ले ली है। तो दोस्तों यदि आप यह जानना चाहते हैं कि SARS और Covid19 में क्या अंतर है तो आज आप बिल्कुल सही जगह पर आए हैं। आज इस आर्टिकल में हम आपके इसी सवाल का जवाब देने वाले हैं।</p>
<h2 style="text-align: justify;">कोविड और सार्स में अंतर (Difference Between COVID 19 and SARS Hindi)</h2>
<p style="text-align: justify;">Comparison Chart &#8211; SARS और Covid 19 की तुलना सारणी निम्नलिखित है-</p>

<table id="tablepress-2" class="tablepress tablepress-id-2">
<thead>
<tr class="row-1">
	<th class="column-1">विवरण</th><th class="column-2">Covid 19</th><th class="column-3">SARS</th>
</tr>
</thead>
<tbody class="row-striping row-hover">
<tr class="row-2">
	<td class="column-1">अर्थ</td><td class="column-2">कोविद-19 भी एक श्वास संबंधी बीमारी का नाम है जो SARS-CoV-2 नामक कोरोनवायरस से होती है।</td><td class="column-3">SARS एक श्वास संबंधी बीमारी का नाम है जो SARS-CoV नामक कोरोनवायरस से होती है।</td>
</tr>
<tr class="row-3">
	<td class="column-1">सामान्य लक्षण</td><td class="column-2">बुखार और खांसी, थकान, सांस लेने में कठिनाई और गले मे दर्द।  </td><td class="column-3">बुखार और खांसी, शरीर में दर्द, सरदर्द और सांस लेने में कठिनाई।  </td>
</tr>
<tr class="row-4">
	<td class="column-1">गंभीरता</td><td class="column-2">80% से ज्यादा संक्रमित व्यक्तियों मे इसके सामान्य लक्षण या कोई लक्षण दिखाई नहीं देते।</td><td class="column-3">संक्रमित व्यक्तियों में इसके अधिक गंभीर लक्षण दिखाई देते है।</td>
</tr>
<tr class="row-5">
	<td class="column-1">हस्तांतरण की गति</td><td class="column-2">यह वायरस SARS के मुक़ाबले बहुत अधिक तेज़ गति से हस्तांतरित होता है।</td><td class="column-3">यह वायरस धीमी गति से हस्तांतरित होता है।</td>
</tr>
<tr class="row-6">
	<td class="column-1">निदान</td><td class="column-2">सामान्य लक्षण होने के कारण इस बीमारी का पता आसानी से नहीं लगता।</td><td class="column-3">अधिक गंभीर लक्षण होने के कारण इस बीमारी का पता आसानी से लग जाता है।</td>
</tr>
<tr class="row-7">
	<td class="column-1">मृत्यु दर</td><td class="column-2">इस वायरस से मरने वालों की मृत्यु दर SARS के मुक़ाबले कम होती है।</td><td class="column-3">इस वायरस से मरने वालों की मृत्यु दर Covid-19 के मुक़ाबले अधिक होती है।</td>
</tr>
</tbody>
</table>

<h2 style="text-align: justify;">Corona Virus <strong>क्या</strong> <strong>है</strong><strong>?</strong></h2>
<p style="text-align: justify;">What is Corona Virus &#8211; कोरोनावायरस बहुत से वायरसों का एक समूह है जो मुख्य रूप से पक्षियों और स्तनधारियों को संक्रमित करते है। आमतौर मनुष्य में यह वायरस सामान्य सर्दी, बुखार और सरदर्द जैसी सामान्य बीमारियों का कारण बन सकता है। ज्यादातर कोरोनावायरस इंसानों के लिए कोई खतरा नहीं होते है लेकिन कुछ कोरोनावायरस जानलेवा भी हो सकते है। ऐसे ही कुछ जानलेवा कोरोनावायरस इतिहास में अपना प्रकोप दिखा चुके हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">विश्व में अभी तक करीब 100 से ज्यादा कोरोनावायरस की खोज हो चुकी है जिसमें 7 ऐसे कोरोना वायरस हैं जो इंसानों को संक्रमित कर सकते हैं। जिसमें 3 मुख्य कोरोनावायरस है: SARS-CoV, MERS-CoV और SARS-CoV-2. यह कुछ ऐसे खतरनाक कोरोनवायरस है जिनहोने इतिहास में करोड़ो लोगों को संक्रमित किया है। कोरोनावायरस SARS-CoV से होने वाली बीमारी को SARS कहा जाता है, MERS-CoV से होने वाली बीमारी को MERS कहा जाता है और SARS-CoV-2 से होने वाली बीमारी को Covid19  कहा जाता है।</p>
<p style="text-align: justify;">इन सात कोरोना वायरसों में से चार कोरोनावायरस के कुछ साधारण लक्षण ही होते हैं जैसे कि बुखार, जुखाम या गले में दर्द। दो कोरोनावायरस SARS-CoV और MERS-CoV  वायरस हमारे फेफड़ों को सीधा संक्रमित करते हैं। और एक कोरोना SARS-CoV-2 वायरस से होने वाली बीमारी Covid-19 में इन सभी कोरोनावायरस के लक्षण पाए है। यह सामान्य बुखार, जुखाम के साथ &#8211; साथ फेफड़ों को भी संक्रमित करता है। SARS-CoV और MERS-CoV दोनों ही वायरस काफी हद तक एक समान ही होते है, दोनों से होने वाली बीमारियां और इलाज भी काफी हद तक एक समान ही होते है। परंतु SARS-CoV-2 इन दोनों से थोड़ा अलग होता है। </p>
<p><span style="color: #0000ff;">ये भी पढ़े &#8211; <a style="color: #0000ff;" href="https://antarjano.com/difference-between-homeopathy-and-allopathy-in-hindi/" rel="bookmark">Difference Between Homeopathy and Allopathy in Hindi 2022 (With Table) | होम्योपैथी और एलोपैथी में अंतर | Homeopathy aur Allopathy me antar</a></span></p>
<h2 style="text-align: justify;"><strong>SARS</strong> <strong>क्या</strong> <strong>है</strong><strong>?</strong></h2>
<p style="text-align: justify;">SARS – SARS, कोरोनावायरस  SARS-CoV  से होने वाली एक श्वास संबंधी बीमारी का नाम है। SARS यानि कि सीवियर एक्यूट रिस्पेरेटरी सिंड्रोम (Severe Acute Respiratory Syndrome- SARS)  का प्रकोप 2002 के अंत से लेकर 2003 तक रहा था। इस वायरस से करीब 8000 लोग संक्रमित हुए थे जिसमें 700 लोगों की मौत हो गई थी। इस वायरस की शुरुआत चाइना में फोशान के गुआंग्डोंग जगह से हुई थी। ऐसा माना जाता है कि यह वायरस की उत्पति चमकादड़ो से हुई थी और उसके बाद बिल्ली के माध्यम द्वारा यह इंसानों में प्रवेश कर गया।</p>
<p><span style="color: #0000ff;">ये भी पढ़े &#8211; <a style="color: #0000ff;" href="https://antarjano.com/difference-between-ct-scan-and-mri-hindi/" rel="bookmark">सीटी स्कैन और एमआरआई में अंतर (2023 with table) | Difference Between CT Scan and MRI in Hindi</a></span></p>
<h2 style="text-align: justify;"><strong>Covid-19 </strong><strong>क्या</strong> <strong>है</strong><strong>?</strong></h2>
<p style="text-align: justify;">Covid-19: Covid-19, कोरोनावायरस SARS-CoV-2 से होने वाली एक श्वास संबंधी बीमारी का नाम है। Covid-19 में Co का अर्थ है <a href="https://www.cowin.gov.in" target="_blank" rel="noopener">Covid</a> (कोविड), V का अर्थ है Virus (वायरस) और D का अर्थ है disease (डिजीज)। शुरुआत में इस बीमारी को &#8216;2019 नॉवेल कोरोनावायरस&#8217; या &#8216;2019-nCoV&#8217; से भी कहा जाता था।</p>
<p style="text-align: justify;">यह वायरस सबसे पहले दिसंबर 2019 में चाइना यह वुहान जगह पर पाया गया था। उसी समय से इस महामारी का प्रकोप पूरे विश्व में पड़ रहा है। अभी तक विश्व में करोड़ों लोग इस से संक्रमित हो चुके हैं और लाखों लोग अपनी जान गवां चुके हैं।</p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>Corona Virus कैसे फैलता है?</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">दोस्तों जैसा कि हम जानते हैं Covid-19 और SARS दोनों ही, कोरोनावायरस से होने वाली श्वास संबंधी बीमारियां है। ऐसे में यह दोनों बीमारियों के फैलने के माध्यम एक समान ही है।</p>
<ul style="text-align: justify;">
<li>श्वास बूंदों जैसे कि खांसी या छींक के द्वारा।</li>
<li>त्वचा के संपर्क द्वारा।</li>
<li>किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क मे आई दूषित सतह को छूने से।</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"></p>
<p style="text-align: justify;">आप पढ़े रहे है &#8211; 6 Difference Between SARS and Covid 19 in Hindi</p>
<p style="text-align: justify;">

</p>
<h2 class="wp-block-heading" style="text-align: justify;"><strong>निष्कर्ष (Conclusion)</strong></h2>
<p style="text-align: justify;">दोस्तों SARS और Covid-19 इन दोनों ही कोरोनावायरस से ही श्वास संबंधी बीमारियां होती हैं। दोनों ही वायरसों में कुछ समानताएं हैं जैसे कि दोनों की की उत्पत्ति जानवरों से हुई है, दोनों ही श्वास संबंधी बीमारियां हैं, दोनों के हस्तांतरित होने के माध्यम भी एक समान है। परंतु साथ ही साथ में दोनों मे कुछ अंतर भी है जैसे कि Covid-19, SARS के मुकाबले अधिक तेजी से फैलता है, ज़्यादातर SARS वायरस के Covid-19 के मुकाबले अधिक गंभीर लक्षण दिखाई देते है और दोनों से मरने वालों की मृत्यु दर में भी काफी अंतर है।</p>
<p style="text-align: justify;">

</p>
<p style="text-align: justify;">आप पढ़े रहे है &#8211; 6 Difference Between SARS and Covid 19 in Hindi</p>
<p style="text-align: justify;">

</p>
<p style="text-align: justify;">दोस्तों उम्मीद करता हूं कि आप SARS और covid-19  मेंअंतर को समझ गए होंगे। यदि हमारे आर्टिकल से जुड़ा कोई भी सवाल आपके मन में है तो आप हम से कमेंट सेक्शन में पूछ सकते हैं हम जल्द से जल्द आपके सवाल का जवाब देने का प्रयास करेंगे।</p>
<p>अगला आर्टिकल जरूर पढ़े &#8211; <a class="row-title" href="https://antarjano.com/wp-admin/post.php?post=17&amp;action=edit" aria-label="“Difference Between CT Scan and MRI in Hindi” (Edit)">Difference Between CT Scan and MRI in Hindi</a></p>
<p></p>]]></content:encoded>
					
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		<title>टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज में अंतर (2023 with table) &#124; 7 Difference Between Type1 and Type2 Diabetes in Hindi</title>
		<link>https://antarjano.com/difference-between-type1-and-type2-diabetes-hindi/</link>
					<comments>https://antarjano.com/difference-between-type1-and-type2-diabetes-hindi/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Neeti Jain]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Apr 2024 13:35:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Medical]]></category>
		<category><![CDATA[Difference Between]]></category>
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		<category><![CDATA[Difference Between Type1 and Type2 Diabetes in Hindi]]></category>
		<category><![CDATA[type1 diabetes]]></category>
		<category><![CDATA[type1 type 2 diabetes]]></category>
		<category><![CDATA[type1 type2 diabetes hindi]]></category>
		<category><![CDATA[type2 diabetes]]></category>
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					<description><![CDATA[Difference Between Type1 and Type2 Diabetes in Hindi - आज हम टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज के बारे में जानकर दोनों के बीच के अंतर को भी जानेंगे!]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p style="text-align: justify;">टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज में अंतर (2023 with table), 7 Difference Between Type1 and Type2 Diabetes in Hindi &#8211; आज की अनियमित जीवन शैली के कारण इन्सान बहुत से बिमारियों से घिरा हुआ है, और इन सबमे शुगर और BP, ब्लड प्रेशर और थायराइड ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया हुआ है। आज के लेख में हम शुगर/मधुमेह के बारे में जानेंगे कि ये क्या है, ये क्यों होती है, और इसके कितने प्रकार है और इन टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज में क्या अंतर है। तो चलिए शुरू करते है।</p>
<h2 style="text-align: justify;"><strong><span id="_1__2">टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज में अंतर (7 Difference Between Type1 and Type2 Diabetes in Hind) </span></strong></h2>
<p style="text-align: justify;"><span id="_1__2">Comparison Chart &#8211; टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज की तुलना सारणी निम्नलिखित है-</span></p>

<table id="tablepress-3" class="tablepress tablepress-id-3">
<thead>
<tr class="row-1">
	<th class="column-1">विवरण</th><th class="column-2">टाइप 1 मधुमेह</th><th class="column-3">टाइप 2 मधुमेह</th>
</tr>
</thead>
<tbody class="row-striping row-hover">
<tr class="row-2">
	<td class="column-1">अर्थ</td><td class="column-2">इंसुलिन का उत्पादन न होने पर रक्त मे शुगर की वृद्धि।</td><td class="column-3">शारीर द्वारा उत्पादित इंसुलिन का उपयोग करने की क्षमता खो देने के कारण रक्त मे शुगर की वृद्धि।</td>
</tr>
<tr class="row-3">
	<td class="column-1">आयु वर्ग</td><td class="column-2">इस प्रकार का मधुमेह मुख्यतः 15 या उससे कम आयु के लोगों मे दिखाई देता है।</td><td class="column-3">इस प्रकार का मधुमेह मुख्यतः 40 या उससे अधिक आयु के लोगों मे दिखाई देता है।</td>
</tr>
<tr class="row-4">
	<td class="column-1">इलाज</td><td class="column-2">इसका फिलहाल कोई सटीक इलाज नहीं है।</td><td class="column-3">इसका इलाज संभव है।</td>
</tr>
<tr class="row-5">
	<td class="column-1">तीव्रता</td><td class="column-2">इस प्रकार का मधुमेह अधिक जानलेवा होता है।</td><td class="column-3">इस प्रकार का मधुमेह अधिक जानलेवा नहीं होता है।</td>
</tr>
<tr class="row-6">
	<td class="column-1">समान्यता</td><td class="column-2">इस प्रकार का मधुमेह बहुत कम लोगों में दिखाई देता है।</td><td class="column-3">इस प्रकार का मधुमेह विश्व मे कुल पीड़ित मधुमेह लोगों में से 90-95% बहुत कम लोगों मे पाया है।</td>
</tr>
<tr class="row-7">
	<td class="column-1">प्रबंधन</td><td class="column-2">टाइप 1 डायबिटीज में आपके ब्लड शुगर को आप इंसुलिन ले कर नियंत्रित कर सकते है।</td><td class="column-3">आप टाइप 2 डायबिटीज को टाइप 1 की तुलना में अधिक तरीकों से मैनेज कर सकते हैं। इनमें दवा, व्यायाम और आहार शामिल हैं। टाइप 2 वाले लोगों को भी इंसुलिन प्रिसक्राईब किया जा सकता है।</td>
</tr>
<tr class="row-8">
	<td class="column-1">लक्षण</td><td class="column-2">टाइप 1 के लक्षण अधिक तेजी से प्रकट होते हैं।</td><td class="column-3">टाइप 2 के लक्षणों अनदेखे हो सकते है क्योंकि वे समय के साथ धीरे-धीरे दिखाई देते हैं।</td>
</tr>
</tbody>
</table>

<h2 style="text-align: justify;"><span id="i"><strong>मधुमेह/शुगर क्या होता है? (What is Diabetes in Hindi)<br /></strong></span></h2>
<p style="text-align: justify;">What is Diabetes in Hindi – दोस्तों मधुमेह में एक बहुत ही गंभीर बीमारी का नाम है। यह बीमारी आपके शरीर के रक्त में उपस्थित Sugar (शर्करा) को नियंत्रण करने की क्षमता को प्रभावित करती है। Sugar शर्करा आप की कोशिकाओं को पोषित करने वाला ईंधन होता है। लेकिन शर्करा को आप की कोशिकाओं में प्रवेश करने के लिए इंसुलिन की आवश्यकता पड़ती है। इंसुलिन की सहायता से ही शर्करा आपकी कोशिकाओं तक पहुंचता है। मधुमेह बीमारी इसी इंसुलिन की प्रक्रिया को प्रभावित करता है।</p>
<p style="text-align: justify;">तो चलिये दोस्तों अब यह जानते है की मधुमेह कितने प्रकार का होता है और यह आपके शरीर को किस तरह प्रभावित करता है।</p>
<p style="text-align: justify;">आप पढ़ रहे है – Difference Between Type1 and Type2 Diabetes in Hindi</p>
<h2 style="text-align: justify;"><span id="i-2"><strong>मधुमेह</strong> <strong>कितने</strong> <strong>प्रकार का होता है</strong><strong>? (Types of Diabetes)<br /></strong></span></h2>
<p style="text-align: justify;">Types of Diabetes – मधुमेह दो प्रकार का होता है-</p>
<ul style="text-align: justify;">
<li><strong>टाइप 1 / Type 1 Diabetes –</strong> <a href="https://www.webmd.com/diabetes/type-1-diabetes" target="_blank" rel="noopener">टाइप 1 मधुमेह</a> से पीड़ित व्यक्ति का शरीर इंसुलिन का उत्पादन नहीं कर पाता है। ऐसी अवस्था में शुगर व्यक्ति की कोशिकाओं तक नहीं पहुंच पाता है और और खून में शुगर की मात्रा में वृद्धि हो जाती है।</li>
<li><strong>टाइप 2 / Type 2 Diabetes –</strong> <a href="https://www.webmd.com/diabetes/type-2-diabetes" target="_blank" rel="noopener">टाइप 2 मधुमेह</a> से पीड़ित लोगों के शरीर में इंसुलिन का उत्पादन तो होता है परंतु व्यक्ति का शरीर इंसुलिन का सही रूप से प्रयोग नहीं कर पाता है। जिसकी वजह से व्यक्ति के रक्त में शुगर की मात्रा बढ़ने लगती है। ज्यादा समय तक इस से पीड़ित व्यक्ति में इंसुलिन का उत्पादन होना भी धीरे-धीरे कम होने लग जाता है।</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;">दोनों ही प्रकार के मधुमेह आपके शरीर मे इंसुलिन बनने के प्रक्रिया या इंसुलिन द्वारा शुगर के प्रवाह की प्रक्रिया को बाधित करते हैं जिसकी वजह से रक्त में शुगर के स्तर की वृद्धि हो जाती है। जिससे व्यक्ति मधुमेह से पीड़ित हो जाता है। सही समय पर उपचार न मिलने से यह बीमारी जानलेवा बन जाती है।</p>
<p style="text-align: justify;">आप पढ़ रहे है – Difference Between Type1 and Type2 Diabetes in Hindi</p>
<h2 style="text-align: justify;"><strong>मधुमेह</strong> <strong>के</strong> <strong>लक्षण (</strong><span id="i-3"><strong>Diabetes </strong></span><span id="i-3"><strong>Symptoms)<br /></strong></span></h2>
<p style="text-align: justify;">Symptoms of Diabetes – मधुमेह के सामन्य लक्षण इस प्रकार है –</p>
<ul style="text-align: justify;">
<li>बार-बार पेशाब आना</li>
<li>अधिक प्यास लगना</li>
<li>भूख में वृद्धि</li>
<li>घाव के ठीक होने में देरी</li>
<li>थकान</li>
<li>वजन में कमी</li>
<li>चिड़चिड़ापन</li>
<li>हाथों और पैरों में सूजन।</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;">दोस्तों यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि दोनों ही प्रकार के मधुमेह में लक्षण एक समान है लेकिन दोनों से पीड़ित लोगों में लक्षण दिखने के समय में अंतर होता है। टाइप 1 से पीड़ित व्यक्ति में लक्षण टाइप 2 मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति के मुकाबले अधिक जल्दी दिखाई देने लगते हैं। टाइप 2 मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति में लक्षण धीरे धीरे दिखते हैं और काफी समय तक इसका पता लगाना काफी मुश्किल होता है।</p>
<h3><span id="_1"><strong>टाइप</strong><strong> 1 </strong><strong>मधुमेह</strong> <strong>के</strong> <strong>कारण</strong></span></h3>
<p style="text-align: justify;">दोस्तों हमारे शरीर की एक प्रतिरक्षा प्रणाली होती है जो हमारे शरीर को बाहरी हानिकारक वायरस और बैक्टीरिया से लड़ने की क्षमता प्रदान करते हैं। यह प्रतिरक्षा प्रणाली हमारे शरीर को इन बाहरी वायरस और बैक्टीरिया से सुरक्षित रखती है। परंतु टाइप 1 मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति के शरीर में उस व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली इंसुलिन उत्पादक बैक्टीरिया को नष्ट करने लग जाती है।</p>
<p style="text-align: justify;">यह बैक्टीरिया हमारे शरीर के लिए आवश्यक होते हैं परंतु प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा नष्ट किए जाने पर हमारा शरीर इन बैक्टीरिया का उत्पादन करने में असमर्थ हो जाता है। शोधकर्ताओं द्वारा यह अभी तक नहीं पता चला है कि ऐसा क्यों होता है हालांकि कुछ शोधों में यह पता चला है कि यह कुछ वायरस के संपर्क में आने या कुछ पर्यावरणीय कारकों द्वारा भी हो सकता है।</p>
<h3 style="text-align: justify;"><span id="_2"><strong>टाइप</strong><strong> 2 </strong><strong>मधुमेह</strong> <strong>के</strong> <strong>कारण</strong></span></h3>
<p style="text-align: justify;">टाइप 2 मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति का शरीर इंसुलिन का उत्पादन तो करता है परंतु इसके उपयोग करने की क्षमता को खो देता है। इस प्रकार के मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति के शरीर में इंसुलिन का उत्पादन तो काफी समय तक होता रहता है लेकिन शरीर उसका उपयोग न कर पाने के कारण रक्त में शुगर की मात्रा बढ़ने लगती है।</p>
<p style="text-align: justify;">लंबे समय तक टाइप 2 मधुएह से पीड़ित होने के बाद शरीर इंसुलिन का उत्पादन करना बंद कर देता है।शोधकर्ताओं द्वारा इसका अभी तक पता नहीं लगाया जा सका है कि ऐसा क्यों होता है लेकिन कुछ शोधों में पता चला है कि कुछ पर्यावरणीय या जीवन शैली कारकों द्वारा भी व्यक्ति इस बीमारी से पीड़ित हो सकता है।</p>
<h3 style="text-align: justify;"><span id="_1-2"><strong>टाइप</strong><strong> 1 </strong><strong>मधुमेह</strong> <strong>का</strong> <strong>उपचार</strong></span></h3>
<p style="text-align: justify;">टाइप 1 मधुमेह एक ऐसी बीमारी है जिसका अभी तक कोई उपचार नहीं मिल पाया है। क्योंकि इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के शरीर मे इंसुलिन का उत्पादन नहीं होता तो इसे समय समय पर शरीर में इंजेक्ट करवाना पड़ता है।</p>
<h3 style="text-align: justify;"><span id="_2-2"><strong>टाइप</strong><strong> 2 </strong><strong>मधुमेह</strong> <strong>का</strong> <strong>उपचार</strong></span></h3>
<p style="text-align: justify;">टाइप 2 मधुमेह बीमारी का उपचार संभव है। सही आहार, व्यायाम और सही दिनचर्या के द्वारा इस बीमारी को बचा और इसका उपचार भी किया जा सकता है। हालांकि कुछ मामलों मे अधिक चिकित्सक सहायता की आवश्यकता पड़ सकती है।</p>
<h2 style="text-align: justify;"><span id="Conclusion"><strong>निष्कर्ष (Conclusion)<br /></strong></span></h2>
<p style="text-align: justify;"><span id="Conclusion">Conclusion &#8211; </span>दोस्तों मधुमेह एक बीमारी का नाम है जो रक्त मे शुगर की वृद्धि से होती है। दोनों ही प्रकार टाइप 1 और टाइप 2 दोनों ही इंसुलिन द्वारा रक्त में शुगर के प्रवाह की प्रक्रिया को प्रभावित करते है। मधुमेह एक जानलेवा बीमारी है परंतु सही समय पर इलाज हो जाने जाने से टाइप 2 मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति को ठीक किया जा सकता है।</p>
<p style="text-align: justify;">टाइप 1 से पीड़ित व्यक्ति को अधिक देखभाल की आव्श्क्यता होती है औए उसे समय समय पर इंसुलिन इंजेक्ट करना पड़ता है। कुछ शोधों के मुताबिक यदि आप मधुमेह से बचना चाहते है तो सही भोजन और व्यायाम ही सबसे कारगर माना जाता है।</p>
<p style="text-align: justify;">दोस्तों उम्मीद करता हूँ कि आप मधुमेह क्या होता है, टाइप 1 और टाइप 2 मधुमेह मे क्या अंतर होता है के बारे में जान गए होंगे। यदि हमारे आर्टिकेल से जुड़ा कोई भी सवाल आपके मन में है तो आप कमेंट सेक्शन मे पूछ सकते है। हम जल्द से जल्द आपके सवाल का जवाब देने का प्रयास करेंगे।</p>
<p>अगला आर्टिकल जरूर से पढ़े &#8211; <a class="row-title" href="https://antarjano.com/wp-admin/post.php?post=106&amp;action=edit" aria-label="“Difference Between Credit Card and Debit Card in Hindi” (Edit)">Difference Between Credit Card and Debit Card in Hindi</a></p>
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		<title>Difference Between Homeopathy and Allopathy in Hindi 2022 (With Table) &#124; होम्योपैथी और एलोपैथी में अंतर &#124; Homeopathy aur Allopathy me antar</title>
		<link>https://antarjano.com/difference-between-homeopathy-and-allopathy-in-hindi/</link>
					<comments>https://antarjano.com/difference-between-homeopathy-and-allopathy-in-hindi/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Neeti Jain]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Apr 2024 13:35:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Medical]]></category>
		<category><![CDATA[General]]></category>
		<category><![CDATA[allopathy]]></category>
		<category><![CDATA[Difference Between]]></category>
		<category><![CDATA[differencebetween]]></category>
		<category><![CDATA[homeopath vs allopath]]></category>
		<category><![CDATA[homeopathy]]></category>
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					<description><![CDATA[Difference Between Homeopathy and Allopathy in Hindi - आज हम होम्योपैथी और एलोपैथी के बारे में जानेंगे और ये भी जानेंगे की दोनों में बुनियादी अंतर क्या है और इन्हें कब और कहाँ उपयोग में लाना चाहिए।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">Difference Between Homeopathy and Allopathy in Hindi 2022 (With Table), होम्योपैथी और एलोपैथी में अंतर &#8211; आज के आधुनिक समय में लाइफस्टाइल की वजह से हमे बहुत सी बीमारियों ने जकड़ लिया है और उन्ही के इलाज के चक्कर में कई बार हम इस सोच में पड़ जाते है कि इलाज के लिए एलोपैथी और होम्योपैथी, कौन से तरीके को अपनाएँ।</p>
<p style="text-align: justify;">देखिये दोनों के अपने अपने महत्त्व और उपयोगिता है, जब हमे तुरंत इलाज की जरुरत होती है तो हम एलोपैथी के उपयोग को नकार नही सकते, वही अगर हमे बिना साइड इफ़ेक्ट के इलाज की तरफ जाना है तो होम्योपैथी इसका अच्छा उदहारण है।</p>
<p>अगर हम बात करें तो दोनों में अच्छा खासा अंतर है और अगर आप ये अंतर जानना चाहते है तो बने रहिये हमारे साथ अंत तक, आज हम होम्योपैथी और एलोपैथी के बारे में जानेंगे और ये भी जानेंगे की दोनों में बुनियादी अंतर क्या है और इन्हें कब और कहाँ उपयोग में लाना चाहिए।</p>
<h2 style="text-align: justify;"><strong>तुलना सारणी (Comparison Chart)</strong></h2>
<table style="width: 99.804%;" width="614">
<tbody>
<tr>
<td style="width: 50.2488%;"><strong>होम्योपैथी (Homeopathy)<br />
</strong></td>
<td style="width: 84.9088%;" width="293"><strong>एलोपैथी (Allopathy)<br />
</strong></td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 50.2488%;">होम्योपैथी इस अवधारणा पर आधारित है कि &#8216;जिस स्रोत से बीमारी हुई है, वह इसे ठीक कर देगा।&#8217;</td>
<td style="width: 84.9088%;" width="293">एलोपैथी एक विश्वास/अवधारणा पर आधारित है, अर्थात, &#8216;इलाज कारण के अलावा कुछ और या अन्य है।&#8217;</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 50.2488%;">होम्योपैथिक दवाएं रोगी को रोग से मुक्ति दिलाने में थोड़ा समय लेती हैं। होम्योपैथिक दवाएं तुरंत परिणाम नहीं देती हैं।</td>
<td style="width: 84.9088%;" width="293">दूसरी ओर, एलोपैथी रोगी को तुरंत राहत देती है, लेकिन इसके कुछ दुष्प्रभाव भी होते हैं।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 50.2488%;">होम्योपैथी शरीर को ठीक करने और उसमें बदलाव लाने की अवधारणा में विश्वास करती है ताकि शरीर बेहतर तरीके से कार्य कर सके।</td>
<td style="width: 84.9088%;" width="293">एलोपैथी दवाओं के जरिए मरीज को तुरंत राहत देने में विश्वास रखती है।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 50.2488%;">होम्योपैथी शरीर को किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुंचाती है। यह नई के साथ-साथ पुरानी बीमारियों के इलाज पर केंद्रित है।</td>
<td style="width: 84.9088%;" width="293">दूसरी ओर, एलोपैथी का संबंध शरीर के एक विशेष अंग के इलाज से है जो बीमारी के कारण बाधित हो गया है। लेकिन बीमारी के इलाज में, इसके साइड-इफेक्ट्स भी हैं।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 50.2488%;">होम्योपैथिक डॉक्टरों का मानना है कि मानसिक और भावनात्मक असंतुलन के कारण रोगियों में कई बीमारियां होती हैं। होम्योपैथी में डॉक्टर बीमारियों का इलाज दवाओं की सबसे छोटी खुराक से करते हैं जो प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित नहीं करती है।</td>
<td style="width: 84.9088%;" width="293">एलोपैथी को &#8216;दोहरी धार वाली तलवार&#8217; के रूप में जाना जाता है क्योंकि डॉक्टर बीमारी के इलाज के लिए दवाओं पर बहुत अधिक निर्भर होते हैं। और उन दवाओ में साइड इफ़ेक्ट साथ में आते है</td>
</tr>
<tr>
<td style="width: 50.2488%;">होम्योपैथी हमेशा एक दर्द रहित उपचार रहा है जिसमें रोगियों को दवाओं की छोटी खुराक दी जाती है।</td>
<td style="width: 84.9088%;" width="293">एलोपैथी में दर्दनाक उपचार शामिल हैं जिसमें रोगी से कई मशीनें जुड़ी होती हैं।</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<h2 style="text-align: justify;"><strong>होम्योपैथी </strong><strong>(What is Homeopathy, Homeopathy kya hai)</strong></h2>
<p style="text-align: justify;">होम्योपैथी एक चिकित्सा प्रणाली है जो इस विश्वास पर आधारित है कि शरीर खुद को ठीक कर सकता है। जो लोग इस चिकित्सा प्रणाली की प्रैक्टिस करते हैं वे कम मात्रा में प्राकृतिक पदार्थों जैसे की पौधों और खनिजों का उपयोग करते हैं। उनका मानना है कि ये उपचार प्रक्रिया को उत्तेजित करते हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">होम्योपैथी के पीछे एक मूल धारणा है &#8220;एक जैसी चीज़े एक दुसरे को ठीक कर सकती है&#8221; (like cures like) दूसरे शब्दों में, ऐसा पदार्थ जो एक स्वस्थ व्यक्ति में बीमारी के लक्षण लाता है – अगर उसे बहुत कम खुराक में दीया जायें तो वो समान लक्षणों वाली बीमारी का इलाज कर सकता है। यह शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा को ट्रिगर करने के लिए है ।</p>
<p style="text-align: justify;">होम्योपैथी के तीन महत्वपूर्ण सिद्धांत हैं, वे हैं:</p>
<ul style="text-align: justify;">
<li>एक जैसी चीज़े एक दुसरे को ठीक कर सकती है&#8221; (like cures like)</li>
<li>न्यूनतम खुराक (Minimum dose)</li>
<li>एकल उपाय (Single Remedy)</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;">वैकल्पिक चिकित्सा के इस रूप का उद्देश्य न केवल प्रभावित हिस्से का इलाज करना है बल्कि वास्तव में मानव शरीर की संपूर्णता पर काम करना है, जिससे रोग की जड़ को ख़त्म किया जा सके।</p>
<h2 style="text-align: justify;"><strong>एलोपैथी (What is Allopathy, Allopathy kya hai)<br />
</strong></h2>
<p style="text-align: justify;">एलोपैथी: चिकित्सा पद्धति की वह प्रणाली जो उपचार के तहत रोग से उत्पन्न होने वाले प्रभावों से भिन्न प्रभाव उत्पन्न करने वाले उपचारों के उपयोग से रोग का इलाज करती है।</p>
<p style="text-align: justify;">एलोपैथी आधुनिक चिकित्सा या पश्चिमी चिकित्सा के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है। यह मोटे तौर पर एक लक्षण का इलाज किसी ऐसी चीज के साथ करने के लिए करता है जो इसके विपरीत है।</p>
<p style="text-align: justify;">जर्मन चिकित्सक सैमुअल हैनिमैन ने एलोपैथी शब्द गढ़ा और उसके बाद ही ये प्रचलन में आया। एलोपैथिक चिकित्सक लक्षण पर ध्यान केंद्रित करने के इलाज करते है न की बीमारी के कारण पर। एलोपैथी की एप्रोच कुछ इस प्रकार की है जिसमे बीमारी का इलाज करना है मुख्य मुद्दा है न कि मूल कारण जानना। जब कोई व्यक्ति बीमार होता है, तो डॉक्टरों द्वारा स्थिति और लक्षणों का इलाज करने के लिए दवाओं का उपयोग किया जाता है।</p>
<ul>
<li class="entry-title"><span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://antarjano.com/difference-between-ct-scan-and-mri-hindi/" rel="bookmark">CT Scan और MRI में अंतर, Difference Between CT Scan and MRI in Hindi</a></span></li>
<li class="entry-title"><a href="https://antarjano.com/difference-between-covid-19-and-sars-hindi/" rel="bookmark"><span style="color: #0000ff;">कविड और सार्स में अंतर, Difference Between COVID 19 and SARS in Hindi</span></a></li>
</ul>
<p style="text-align: justify;">उपचार इसके साथ किया जाता है:</p>
<ul style="text-align: justify;">
<li>दवाई (medication)</li>
<li>शल्य चिकित्सा (surgery)</li>
<li>विकिरण/रेडिएशन (radiation)</li>
<li>अन्य उपचार (therapies) और प्रक्रियाएं (procedures)</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;">जो लोग तुरंत राहत चाहते हैं वे एलोपैथिक दवाओं की तरफ जाते हैं । उदाहरण के लिए, यदि किसी को सिरदर्द या शरीर में दर्द होता है, तो वह एलोपैथिक दवाओं को उपयोग में लाएगा, क्योंकि वे शरीर के दर्द से तुरंत राहत देने में मदद करती हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">कफ को खत्म करने के बजाय कई कफ सिरप सप्रेसेंट का काम करते हैं। उसी तरह एलोपैथी द्वारा सुझाई गई कई दवाएं और दवाएं रोग के मूल कारण को ठीक नहीं करती हैं। ऐसी दवाएं कुछ समय के लिए प्रभाव को दबा देती हैं या शरीर के काम करने के तरीके को बदल देती है।</p>
<p style="text-align: justify;">इसके अलावा, एलोपैथिक दवाओं के लंबे समय तक उपयोग के परिणामस्वरूप कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं, जो अधिक जानलेवा हो सकते।</p>
<h2 style="text-align: justify;"><strong>होम्योपैथी और एलोपैथी के मुख्य अंतर (Key Differences between Homeopathy and Allopathy)</strong></h2>
<p style="text-align: justify;">1. होम्योपैथी के पीछे एक मूल धारणा है &#8220;एक जैसी चीज़े एक दुसरे को ठीक कर सकती है&#8221; (like cures like) दूसरे शब्दों में, ऐसा पदार्थ जो एक स्वस्थ व्यक्ति में बीमारी के लक्षण लाता है – अगर उसे बहुत कम खुराक में दीया जायें तो वो समान लक्षणों वाली बीमारी का इलाज कर सकता है। वही एलोपैथी चिकित्सा पद्धति की वह प्रणाली जो उपचार के तहत रोग से उत्पन्न होने वाले प्रभावों से भिन्न प्रभाव उत्पन्न करने वाले उपचारों के उपयोग से रोग का इलाज करती है।</p>
<p style="text-align: justify;">2. होम्योपैथिक दवाएं रोगी को रोग से मुक्ति दिलाने में थोड़ा समय लेती हैं। होम्योपैथिक दवाएं तुरंत परिणाम नहीं देती हैं। दूसरी ओर, एलोपैथी रोगी को तुरंत राहत देती है, लेकिन इसके कुछ दुष्प्रभाव भी होते हैं। आप पढ़ रहे है &#8211; Difference Between Homeopathy and Allopathy in Hindi</p>
<p style="text-align: justify;">3. <a href="https://www.nhp.gov.in/homeopathy_mty" target="_blank" rel="noopener">होम्योपैथी</a> शरीर को ठीक करने और उसमें बदलाव लाने की अवधारणा में विश्वास करती है ताकि शरीर बेहतर तरीके से कार्य कर सके। एलोपैथी दवाओं के जरिए मरीज को तुरंत राहत देने में विश्वास रखती है।</p>
<p style="text-align: justify;">4. होम्योपैथी शरीर को किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुंचाती है। यह नई के साथ-साथ पुरानी बीमारियों के इलाज पर केंद्रित है। दूसरी ओर, एलोपैथी का संबंध शरीर के एक विशेष अंग के इलाज से है जो बीमारी के कारण बाधित हो गया है। लेकिन बीमारी के इलाज में, इसके साइड-इफेक्ट्स भी हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">5. होम्योपैथिक डॉक्टरों का मानना है कि मानसिक और भावनात्मक असंतुलन के कारण रोगियों में कई बीमारियां होती हैं। होम्योपैथी में डॉक्टर बीमारियों का इलाज दवाओं की सबसे छोटी खुराक से करते हैं जो प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित नहीं करती है। एलोपैथी को &#8216;दोहरी धार वाली तलवार&#8217; के रूप में जाना जाता है क्योंकि डॉक्टर बीमारी के इलाज के लिए दवाओं पर बहुत अधिक निर्भर होते हैं। और उन दवाओ में साइड इफ़ेक्ट साथ में आते है।</p>
<p id="tw-target-text" class="tw-data-text tw-text-large tw-ta" dir="ltr" style="text-align: justify;" data-placeholder="Translation"><span class="Y2IQFc" lang="hi">6. अधिकांश होम्योपैथी दवाएं प्राकृतिक पदार्थो जैसे पौधों या खनिजों से बनती हैं, जैसे: अर्निका (arnica), बेलाडोना (belladonna), गेंदा (marigold), सीसा (lead), लैवेंडर (lavender), फॉस्फोरिक एसिड (phosphoric acid)। एलोपैथी में बीमारियों और स्वास्थ्य स्थितियों का इलाज करने या उन्हें दबाने के लिए औषधीय दवाओं और अन्य शारीरिक हस्तक्षेपों का उपयोग किया जाता है। इनमें एंटीबायोटिक्स, रक्तचाप की दवाएं, मधुमेह की दवाएं, माइग्रेन की दवाएं, कीमोथेरेपी जैसी दवाएं शामिल हैं।</span></p>
<p dir="ltr" style="text-align: justify;" data-placeholder="Translation">7. होम्योपैथी हमेशा एक दर्द रहित उपचार रहा है जिसमें रोगियों को दवाओं की छोटी खुराक दी जाती है। एलोपैथी में दर्दनाक उपचार शामिल हैं जिसमें रोगी से कई मशीनें जुड़ी होती हैं।</p>
<h2><strong>निष्कर्ष (Conclusion)</strong></h2>
<p>तो दोस्तो हमे उम्मीद है आपको यह आर्टिकल Difference Between Homeopathy and Allopathy in Hindi जरूर पसंद आया होगा। इसके साथ ही आपको <span class="Y2IQFc" lang="hi">होम्योपैथी </span>और एलोपैथी क्या होते है, उनके बीच क्या मुख्य अंतर है, इसके बारे में भी जानकारी मिल गई होगी। अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो तो हमे कॉमेंट में जरूर बताएं और अगर इसके अलावा भी आपको किसी प्रकार का कोई सवाल है तो हमे जरूर बताएं।</p>
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