8 Difference Between Repo Rate and Reverse Repo Rate in Hindi | रेपो और रिवर्स रेपो रेट में अंतर

8 Difference Between Repo Rate and Reverse Repo Rate in Hindi, रेपो और रिवर्स रेपो रेट में अंतर – भारतीय रिजर्व बैंक ख़ास तौर पर आर्थिक विकास (Financial Development) के विभिन्न पहलुओं को बढ़ावा देने के लिए अर्थव्यवस्था (Economy) में पैसों के सप्लाई को नियंत्रित करने के उद्देश्य से विभिन्न मौद्रिक नीतियां (Monetary Policies) तैयार करता है और उनको Manage करता है।

ऐसी मौद्रिक नीतियों (Monetary Policies) का सबसे पहला उद्देश्य मूल्य स्थिरता (Price Stability) के माध्यम से आर्थिक विकास या फाइनेंसियल डेवलपमेंट को बढ़ावा देना है। इसके साथ साथ बैंक क्रेडिट की मात्रा को Control करके रखना वित्तीय प्रणाली (Financial System) की Efficiency में सुधार लाना, निवेश को बढ़ावा देना और वित्तीय बाजारों (Financial Markets) में Diversification को बढ़ाना है।

इस संदर्भ में, रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट RBI की मौद्रिक नीति (Monetary Policies) के ही टूल्स हैं जो अर्थव्यवस्था में पैसों के सप्लाई को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। और आज के इस आर्टिकल – Difference Between Repo Rate and Reverse Repo Rate में हम इन्ही दोनों के बारे में बात करेंगे और साथ में विस्तृत तौर पर इन दोनों के बीच के अंतर को भी जानने वाले है। तो बने रहिये हमारे साथ आर्टिकल के अंत तक –

तो आईए सबसे पहले हम इन दोनो के बीच के अंतर को एक Tabular Format की मदद से समझ लेते हैं,

रेपो और रिवर्स रेपो रेट में अंतर (Difference Between Repo Rate and Reverse Repo Rate or Comparison Repo Rate vs Reverse Repo Rate)

रेपो और रिवर्स रेपो रेट में अंतर की तुलनात्मक सारणी –

Repo Rate Reverse Repo Rate
रेपो रेट एक बेंचमार्क ब्याज दर (Interest Rate) है, जिस पर केंद्रीय बैंक (RBI) द्वारा कम अवधि के लिए, Collateral के आधार पर कमर्शियल बैंक को पैसा उधार दिया जाता है। रिवर्स रेपो रेट RBI द्वारा जमा पर कमर्शियल बैंकों को दी जाने वाली ब्याज दर है, जो RBI के साथ अपने अधिशेष धन (Surplus Funds) को लगाते हैं।
यह वह रेट है जिस पर अर्थव्यवस्था (Economy) में Liquidity को Inject कर दिया जाता है। यह वह रेट है जिस पर अर्थव्यवस्था (Economy) में Liquidity को Absorb कर लिया जाता है।
रेपो रेट का उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था में धन की कमी को पूरा करना होता है। रिवर्स रेपो रेट का उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था में Liquidity को Manage करना।
रेपो रेट का रेट रिवर्स रेपो रेट की तुलना में काफी ज़्यादा होता है। वही रिवर्स रेपो रेट का रेट रेपो रेट से काफी कम होता है।
रेपो रेट महंगाई को कंट्रोल करने में मददगार साबित होता है। रिवर्स रेपो रेटअर्थव्यवस्था में पैसों के सप्लाई को कंट्रोल करता है।
रेपो रेट Repurchase Agreement पर Charge किया जाता है। रिवर्स रेपो रेट Reverse Repurchase Agreement पर Charge किया जाता है।
अगर रेपो रेट में बढ़ोत्तरी होती है तो इसका मतलब है कमर्शियल बैंको को केंद्रीय बैंक से यह उच्च ब्याज दर पर पैसा लेना होगा, जिससे होगा यह की कमर्शियल बैंक कम पैसा उधार में लेंगे। अगर रिवर्स रेपो रेट में बढ़ोत्तरी होती है यह कमर्शियल बैंकों को केंद्रीय बैंक को अधिक पैसे Transfer करने और ब्याज (Interest) अर्जित करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
रेपो रेट में कमी का प्रभाव यह होता है कि कमर्शियल बैंको को RBI से कर्ज लेना सस्ता हो जाएगा। अगर रिवर्स रेपो रेट में कमी आती है तो इसका प्रभाव ये होगा की बैंक अपना पैसा RBI के पास जमा करने की जगह बेहतर तरीके से निवेश करेंगे।

रेपो रेट किसे कहते हैं (What is Repo Rate in Hindi, Repo Rate Kise Kehte Hai?)

रेपो शब्द का अर्थ ‘Repurchase Agreement’ होता है। रेपो Short Term, Collateral के आधार पर उधार साधन का एक रूप है और इस तरह के उधार के लिए ली जाने वाली ब्याज दर (Interest Rate) को रेपो रेट कहा जाता है।

भारत में, रेपो रेट वह रेट है जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक भारत में कमर्शियल बैंकों को धन की कमी का सामना करने पर धन उधार देता है। कमर्शियल बैंक भारतीय रिजर्व बैंक को Government Securities और Bonds को ब्याज शुल्क के साथ पहले से निर्धारित मूल्य पर भविष्य की तारीख में भारतीय रिजर्व बैंक से Securities और Bonds को फिर से खरीदने के समझौते के साथ बेचते हैं। फरवरी 2022 तक वर्तमान रेपो रेट 4% है।

ये भी पढ़े –

रिवर्स रेपो रेट किसे कहते हैं (What is Reverse Repo Rate in Hindi, Reverse Repo Rate Kise Kehte Hai?)

जैसा कि नाम से ही पता चलता है, रिवर्स रेपो रेट जो की रेपो रेट के विपरीत अनुबंध (Opposite Contract) है। रिवर्स रेपो रेट वह रेट है जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक देश में कमर्शियल बैंकों से धन उधार लेता है।

दूसरे शब्दों में, यह वह रेट है जिस पर भारत में कमर्शियल बैंक अपने ज्यादातर धन को भारतीय रिजर्व बैंक के पास आमतौर पर अल्पावधि (Short Term) के लिए लगाते हैं। हालांकि, RBI रिवर्स रेपो रेट को कम करता है, बैंकों को RBI के पास जमा अपने पैसे पर कम ब्याज मिलेगा। इसलिए, वे अपना पैसा उन निवेश के तरीकों में निवेश करेंगे जिनमें ब्याज दर (Interest Rate) उसकी तुलना में अधिक है, जैसे मुद्रा बाजार (Money Market) आदि। इस से होता ये है की पैसा आने से अर्थव्यवस्था में Liquidity बढ़ जाती है, क्योंकि सिस्टम में अधिक धन का संचार होता है। फरवरी 2022 तक वर्तमान रिवर्स रेपो रेट 3.35% है।

रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट के बीच मुख्य अंतर क्या हैं? (Key Differences Between Repo Rate and Reverse Repo Rate In Hindi)

  • रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर RBI कमर्शियल बैंकों को Collateral के आधार पर Short Term के लिए पैसा उधार देता है। इसके विपरीत, रिवर्स रेपो रेट उस ब्याज दर को संदर्भित करता है जो RBI कमर्शियल बैंक को भुगतान करता है जब वे RBI के साथ अपने अधिशेष धन (Surplus Money) को लगाते हैं।
  • मूल रूप से, रेपो रेट वह रेट है जिस पर बैंकों को उधार देकर अर्थव्यवस्था में Liquidy को Inject किया जाता है। इसके विपरीत, रिवर्स रेपो रेट वह रेट है जिस पर अर्थव्यवस्था में Liquidity को Absorb किया जाता है, बैंक को आकर्षक ब्याज दरों की पेशकश करके वे अपने अधिशेष धन (Surplus Money) को RBI के साथ लगाते हैं।
  • सामान्य तौर पर, रेपो रेट रिवर्स रेपो रेट की तुलना में अधिक होती है।
  • रेपो रेट एक मौद्रिक उपकरण (Monetary Tool) है जिसका इस्तेमाल केंद्रीय बैंक द्वारा महंगाई को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है जबकि एक केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था में पैसों के Supply को नियंत्रित करने के लिए रिवर्स रेपो रेट का इस्तेमाल करता है।
  • जब रेपो रेट में बढ़ोत्तरी होती है, तो उच्च ब्याज दर (High Interest Rate) के कारण कमर्शियल बैंक केंद्रीय बैंक से कम उधार लेते हैं। इसके विपरीत, अगर रिवर्स रेपो रेट में बढ़ोत्तरी होती है, तो यह कमर्शियल बैंक को केंद्रीय बैंक को अधिक पैसा Transfer करने और उस राशि पर ब्याज अर्जित करने के लिए प्रोत्साहित करती है।
  • जाहिर सी बात है कि रेपो रेट में कमी होने पर बैंक सस्ती दरों पर कर्ज ले सकेंगे, जिससे आम जनता को किफायती दरों पर कर्ज मिल सकेगा। दूसरी ओर, अगर रिवर्स रेपो रेट में वृद्धि होती है, तो बैंक RBI के पास अपना पैसा जमा करने की तुलना में अपने पैसे को मुद्रा बाजार (Money Market) में निवेश के बेहतर तरीकों में निवेश करेंगे।

निष्कर्ष (Conclusion)

आज के इस आर्टिकल में हमने रेपो और रिवर्स रेपो रेट में अंतर (Difference Between Repo Rate and Reverse Repo Rate In Hindi) को समझा, साथ ही ये भी समझा की रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट के बीच ज़रूरी अंतर यह है कि रेपो लेनदेन के मामले में, सेंट्रल बैंक एक कमर्शियल बैंक को सस्ती दरों पर उधार प्रदान करके अर्थव्यवस्था में तरलता (Liquidity) का संचार करता है, लेकिन रिवर्स रेपो लेनदेन के मामले में, बैंक रेट में वृद्धि करके अर्थव्यवस्था से Liquidity को Absorb करता है।

अगर इसके बाद भी अगर आपके मन में कोई सवाल है तो मेरे कमेंट बॉक्स में आकर पूछे मैं आपके सवालों का जवाब अवश्य दूंगा तब तक के लिए धन्यवाद और मिलते हैं अगले आर्टिकल में! ऐसे और भी रोचक अन्तरो को जानने के लिए बने रहिये हमारे साथ antarjano.com पर।

Leave a Comment